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चौरीचौरा में दो हजार वर्ष पुरान मिला कुषाणकालीन स्तूप

Nov 17, 2021 am30 10:02am

पुरातत्व विभाग के सर्वे में चौरीचौरा तहसील क्षेत्र के ब्रह्मपुर ब्लॉक में लगभग 2000 वर्ष पूराना कुषाणकालीन स्तूप और मूर्तियां मिली हैं। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी नरसिंह त्यागी व उनकी टीम ने क्षेत्र के ग्राम राजधानी, डीहघाट व ब्रह्मपुर गांव में ऐतिहासिक व पुरातात्विक महत्व के अवशेषों का सर्वे किया। सर्वे के दौरान क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी ने बताया कि डीहघाट में टीले का सर्वेक्षण में कुषाणकालीन स्तूप है, जो लगभग 2000 वर्ष से भी प्राचीन है। टीले की सतह से उत्तरी कृष्ण मार्जित मृदभांड (यन.बी.पी.डब्ल्यू) काल से लेकर मध्यकाल तक के पूरा अवशेष प्राप्त होते हैं, जो लगभग 2600 वर्ष तक प्राचीन है।

उन्होंने बताया कि डीहघाट का पूरा स्थल लगभग डेढ़ से दो किलोमीटर में फैला हुआ है। सपा नेता कालीशंकर द्वारा राजधानी गांव में बताए गए स्थान पर सर्वेक्षण के दौरान पुरातत्व अधिकारी ने बताया कि राजधानी पुरास्थल लगभग तीन किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला है। इस क्षेत्र से पकी हुई ईंटों के टुकड़े तथा पात्रा अवशेष प्राप्त हुए हैं। यहां प्राप्त ईंटों की माप 26×20×5 सेंटीमीटर है। टीले की सतह से कुषाण काल से लेकर के मध्यकाल तक के पूरा अवशेष प्राप्त होते हैं। वर्तमान समय में स्थानीय व्यक्तियों द्वारा टीले को समतल कर कृषि कार्य किया जा रहा है। ब्रह्मपुर के पश्चिम स्थित पक्की ईंटों से निर्मित कुआं जिनकी माप 25×20×5 सेंटीमीटर है, जो गुप्तकालीन अर्थात 1700 वर्ष तक प्राचीन हैं। ब्रह्मपुर स्थित टीला एक से डेढ़ किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला है। टीले की सतह से कुषाण कालीन पात्रा अवशेष व पकी हुई ईटों के टुकड़े प्राप्त होते हैं। ईटों की माप 28×20×05 है। स्थानीय किसान टीले को काटकर अब कृषि कार्य कर रहें है।

ब्रह्मपुर क्षेत्र का है बड़ा पुतत्त्विक महत्व

क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी नरसिंह त्यागी व उनकी टीम ने कहा कि ब्रह्मपुर ब्लॉक के आधा दर्जन गांवों का पुरातात्विक महत्व है। लेकिन लोग जेसीबी से मिट्टी खनन में पुरावशेष को क्षतिग्रस्त कर रहे है। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी ने एसडीएम अनुपम मिश्र से बात कर कहा कि जेसीबी चलने से पुरातात्विक महत्व को नुकसान पहुंच रहा है। एसडीएम ने जांच कराकर कार्यवाई की बात

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कोट

ब्रह्मपुर क्षेत्र में कुषाणकालीन व मध्यकाल के अलावा मौर्यकालीन से मध्यकालीन अवशेष मिले है। इसमे डीहघाट का बड़ा महत्व है। डीहघाट में कुषाणकालीन स्तूप मिला है। सर्वेक्षण रिपोर्ट विभाग को भेजी जाएगी। डीएम से उन स्थानों के राजस्व अभिलेख की जानकारी मांगी जाएगी। इसके बाद पुरातत्व परामर्शदात्री सामिति की बैठक में लिए गए निर्णय के बाद उन स्थानों को संरक्षित किया जाएगा।


Source- https://www.livehindustan.com/uttar-pradesh/gorakhpur/story-kushan-period-stupa-found-two-thousand-years-old-in-chaurichaura-5101079.html

 

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