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नया भारत
नया भारत : एक पाकिस्तानी कवियित्री की कविता
Saturday, 23-June-2007 | 07:43 एक जाप-सा करते जाओ,
बारम्बार यह ही दोहराओ
कितना वीर महान था भारत!
कैसा आलीशान था भारत!
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व्यंग्य
वाह गोरखपुर वाह !
Saturday, 09-June-2007 | 07:02 अखबार में पढ़ा कि गोरखपुर के कारोबारी बनियों के घर छापे में 80 टन वजन के सिक्के बरामद हुए ! एक गोरखपुरिया होने के नाते शर्म से सर झुक गया, पूरे गोरखपुर का नाम "मिट्टी में मिला दिया (शोले स्टाइल में)"… अरे भाई, गोरखपुर की रेपुटेशन का कुछ तो खयाल किया होता। चण्डीगढ़ में एक अधिकारी के घर छापे में तीन कमरे हजार-हजार के नोटों से भरे हुए मिले थे, और तो और, नोयडा में सुखराम के घर से गद्दों में सिले हुए नोट ही नोट मिले थे। अहमदाबाद वालों ने तो घर से बीसियों देशों की करेंसी पकड़वाई थी, और हमारे मुन्ना भाई ने तो हथियारों का शो-रूम ही घर में रखा हुआ था। इन लोगों ने हमारी माया मेम साहब को भी मात कर दिया जो सीबीआई छापे के दौरान कह रही थीं "कि इन लोगों ने नेक लाख रुपये जो गरीबों ने माननीय कांशीराम जी के इलाज के लिये जमा किये थे 10 रुपये और 20 रुपये चन्दा करके-उसे भी नहीं छोड़ा"। हमारे गोरखपुरिए भाई तो बिलकुल ही गये गुजरे निकले, पुलिस वालों को भी शर्म आई होगी- बरामद भी हुआ तो सिक्कॅ, वो भी पांच पैसे और दस पैसे के सिक्के, कुछ बीस के भी थे।
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लालू की धक्का गाड़ी
भारतीय ट्रेन की एक गौरव-गाथा : लक्ष्मी नारायण गुप्त
Sunday, 27-May-2007 | 18:43 कुछ दिन पहिले बी बी सी पर बिहार में एक बिजली की ट्रेन को धक्का दे कर चलाने की कहानी प्रकाशित हुई थी। यह कविता उसी घटना से प्रेरित है।
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उत्तर प्रदेश के चुनाव परिणाम पर एक हास्य कविता
दिव्य दृष्टि : माया की महिमा
Sunday, 13-May-2007 | 07:02 यह कविता नवभारत टाइम्स में छपी थी, यहां अनुनाद के पाठकों के लिये प्रस्तुत है।
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अंतहीन अभीष्ट : शैलेश भारतवासी
अंतहीन अभीष्ट : शैलेश भारतवासी
Monday, 08-January-2007 | 07:47 शैलेश भारतवासी ने अभी पिछले साल ही अभियन्त्रण में स्नातक उपाधि प्राप्त की है। सम्प्रति दिल्ली में रहकर भारतीय अभियन्त्रण सेवा परीक्षा की तैयारी में जुटे हुए हैं। बहुत दिनों से हिन्दी में कविता लिखते हैं। इनकी सारी कविताएं पढ़ने के लिये इनके ब्लोग http://merikavitayen.blogspot.com/ जायें और आनंद उठाएं।
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स्वर्गीय कैलाश गौतम को श्रद्धांजलि
स्वर्गीय कैलाश गौतम को श्रद्धांजलि
Tuesday, 02-January-2007 | 08:32 Renowned Hindi-Bhojpuri poet Kailash Gautam died in Allahabad on 9th December 2006 following a cardiac arrest.
He had authored over a dozen books, some of which had been honoured by the Uttar Pradesh Hindi Sansthan.
He was the president of Allahabad-based literary organisation, the Hindustani Academy. To pay a respect to Late Shri Gautam, here is one of his popular poem for readers of Anunaad. This poem is taken from http://hi.literature.wikia.com/wiki with due acknowledgement.
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AI: Hindi Story By R P Rai
''एै'' : आर. पी. राय की कहानी
Tuesday, 02-January-2007 | 04:23 इस कहानी के लेखक आर0 पी0 राय पूर्वांचल ग्रामीण बैंक के बरिष्ठ अधिकारी हैं, अपने साहित्यिक रूझान के कारण वे बैंक के कार्यो के साथ ही आधुनिक समाज की विभिन्न समस्याओ को कहानियो के रूप मे लिखते रहते हैं । प्रस्तुत कहानी मे उन्होने अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयो में हिन्दी की दुर्दशा को निशाना बनाया है ।
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नव वर्ष पर [ हिन्दी कविता]
भौजी के कंगना से खनके ताल : मनोज भावुक
Monday, 01-January-2007 | 01:16 मनोज भावुक की एक और कविता अनुनाद के पाठकों के लिये प्रस्तुत है। खास तौर से नये साल के सवागत के लिये लिखि गयी है।
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आ भाई २००७
आ भाई २००७
Saturday, 30-December-2006 | 00:51 अमेरिका से अभिनव शुक्ल 2007 का स्वागत अपने ही अन्दाज में कुछ इस तरह से कर रहे हैं. अभिनव की कविताएं उनके ब्लोग http://ninaaad.blogspot.com/ पर देखी जा सकती हैं.
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कन्या भ्रूण हत्या पर मनोज भावुक की कविता
कन्या भ्रूण हत्या पर मनोज भावुक की कविता
Wednesday, 27-December-2006 | 06:45
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एक हिन्दी गज़ल
गज़ल : मनोज भावुक
Tuesday, 26-December-2006 | 08:01 हमें नहीं मालूम था कि मनोज भावुक जी भोजपुरी के साथ-साथ हिन्दी गज़ल के भी रचना कार हैं। न जाने क्या-क्या खूबियाँ समेटे हुये हैं हमारे भावुक जी, धीरे-धीरे पता चल रही हैं। पाठकों को बता दें कि मनोज भावुक जी को इसी साल भारतीय भाषा परिषद की ओर से गुलजार जी ने सम्मानित किया है। भावुक जी की यह हिन्दी गज़ल पेश है, लिंक पर क्लिक करें और आनंद उठाएं।
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अथातो घुमक्कड़ - जिज्ञासा : राहुल सांकृत्यायन
अथातो घुमक्कड़ - जिज्ञासा : राहुल सांकृत्यायन
Wednesday, 06-December-2006 | 08:41 राहुल सांकृत्यायन हिन्दी साहित्य की अद्वितीय विभूति, महान उपासक तथा बहुमुखी सेवक है। आपका साहित्य सृजन विराट था। आप हिन्दी साहित्य के एक समर्थ साहित्यकार है। प्रस्तुत रचना यू.पी. बोर्ड से इण्टर पास करने वाले लोगों ने गद्यगरिमा किताब में जरूर पढी होगी । आइये, इसे दोबारा पढें....
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डॉ. राम दरश मिश्र की कविता
तुम बिन : डॉ० रामदरश मिश्र
Wednesday, 06-December-2006 | 08:33 हिन्दी साहित्य के प्रख्यात लेखक और कवि डॉ. राम दरश मिश्र हमारे प्रिय भोजपुरी कवि पं. राम नवल के भाई हैं और चौरीचौरा के पास ही बिशुनपुरा गाँव के मूल निवासी हैं । वर्तमान में दिल्ली में रहकर हिन्दी जगत की सेवा कर रहे हैं । प्रस्तुत कविता हिन्दी के 100 श्रेष्ठ प्रेम गीतों में एक है ।
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याद है मछली बात पुरानी......
याद है मछली बात पुरानी......
Friday, 01-December-2006 | 08:19 याद है मछली बात पुरानी......गोरखपुर से वरिष्ठ पत्रकार डॉ. कुमार हर्ष की कविता आप सबको बचपन की याद दिला देगी । शीर्षक पर क्लिक करें और कविता का आनंद उठाएं ....
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बोध : अनुपम गुप्त की कविता
बोध : अनुपम गुप्त की कविता
Sunday, 05-November-2006 | 05:13 अनुपम गुप्त कानपुर जिले के निवासी हैं। 1964 में जन्मे अनुपम कई सालों से विविध विषयों पर चित्र बनाते आ रहे हैं। महान चित्रकार नंद लाल बोस से प्रभावित अनुपम ने अपनी पहली पेंटिंग 5 साल की उम्र में बनाई थी। अनुपम पेंटिंग के साथ-साथ कविताएँ भी लिखते हैं। चौरीचौरा डाट काम पर यह उनकी पहली कविता है। साथ ही इनकी पेंटिंग भी प्रस्तुत है।
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देवेन्द्र आर्य की गोरखपुर शहर पर एक कविता
देवेन्द्र आर्य की गोरखपुर शहर पर एक कविता
Saturday, 04-November-2006 | 09:15 स्थानीय कवि देवेन्द्र आर्य ने अपने शहर गोरखपुर पर इतनी सुन्दर कविता की रचना की है जिसे पढ़ कर किसी भी गोरखपुरिये की छाती गर्व से फूल जाये। शीर्षक पर click करें और पूरी कविता का आनंद उठाएं | फोटो गोरखपुर के बिस्मिल पार्क का है।
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दीपावली के शुभ अवसर पर
दिवाली में दीपक
Thursday, 19-October-2006 | 07:35 चौरीचौरा डोट कॉम के सभी आगंतुकों को दीपावली मंगलमय हो !
लक्ष्मी नारायण गुप्त जी की यह प्रेरक कविता शायद आप सबके लिये प्रेरणा देने का काम करेगी ।
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आइने के सामने : उत्कर्ष
आइने के सामने : उत्कर्ष
Wednesday, 16-August-2006 | 07:40 This hindi poem was written by Utkarsh Kumar on a section of 20 meter long white canvas in Gorakhpur on 15th August 2006 to express his feelings on 60th Independence Day of India in a novel way.
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दीवाली : डॉ. अरविंद द्विवेदी
दीवाली : डॉ. अरविंद द्विवेदी
Sunday, 13-August-2006 | 05:44 डॉ. अरविंद द्विवेदी की यह कविता उस व्यक्ति की मन:स्थिति को दर्शाती है जो दीवाली के अवसर पर अपने घर, गाँव और परिजनों से बहुत दूर है ।
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अर्चना मलैया की कविता
मैं और तुम : अर्चना मलैया
Thursday, 10-August-2006 | 18:06 अर्चना जी जबलपुर में रहती हैं और लम्बे समय से लेखन से जुड़ी हैं. आप कविता, कहानी,नाटक, संस्मरण, निबंध सभी विधाओं में लिखती हैं। इनकी रचनाओं का प्रसारण व प्रकाशन नियमित रूप से होता रहता है।
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पत्नी पुराण: लक्ष्मीनारायण गुप्त
पत्नी पुराण: लक्ष्मीनारायण गुप्त
Wednesday, 09-August-2006 | 09:14
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विटुला : डॉ. अरविंद द्विवेदी
विटुला : डॉ. अरविंद द्विवेदी
Wednesday, 09-August-2006 | 07:22 डॉ. अरविंद द्विवेदी की कहानी विटुला मन को छू लेने वाली है. डॉ. द्विवेदी ने यह कहानी १९८५ में लिखी थी जब वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भौतिक शास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि के लिये पढ़ रहे थे. पेशे से सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिकी (कम्प्यूटर चिप्स) के विशेषज्ञ डॉ. द्विवेदी सिंगापुर में कार्यरत हैं. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान से डॉक्टरेट उपाधि धारक इस वैज्ञानिक की रचनाधर्मिता की उपमा अगर सरदारों के मुहल्ले में नाई की दुकान से की जाय तो अतिश्योक्ति नही होगी.
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खलयुग का कोरस
खलयुग का कोरस - स्व. डॉ.हरिवंश राय बच्चन
Sunday, 09-July-2006 | 07:35 डॉ. बच्चन की यह कविता इंडिया टुडे साहित्य वार्षिकी १९९६ में छपी थी. आज के समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के ऊपर एक करारा व्यंग्य है. साथ ही "ज़ुल्म सुना तो तुमने कानों उंगली कर ली,
भ्रष्टाचार दिखा तो आंखों पट्टी धर ली,
" कहकर बच्चन जी ने चुपचाप सब कुछ अनदेखा करने वाली जनता के ऊपर भी चोट की है.
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हिन्दी अपनाएं- श्री
हिन्दी अपनाएं- श्री
Tuesday, 27-June-2006 | 10:48 हिन्दी के प्रचार-प्रसार हेतु लिखी इस तुकबन्दी में श्री ने हर क्षेत्र में हिन्दी के प्रयोग की वकालत की है. हिन्दी का प्रयोग आसान है, जरूरत सिर्फ शुरुआत करने की है. बाकी खुद-बखुद होता जाएगा.
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लालू की रेल- श्री
लालू की रेल- श्री
Monday, 26-June-2006 | 09:36 श्री ने यह छोटी सी कविता भारत की रेल के ऊपर लिखी है. श्री ने तमाम देशों में रेल यात्रा का अनुभव किया है लेकिन जो आनंद भारत में रेल की यात्रा का है, शायद अन्यत्र देखने को ना मिले. इस कविता का मतलब लालू का बखान करने का बिलकुल ही नहीं है. लालू की रेल सिर्फ़ इसलिए लिखा गया है जिससे माननीय लालू प्रसाद जी रेल को अपनी व्यक्तिगत सम्पत्ति ना समझें और इसे राष्ट्रीय सम्पत्ति ही समझें. अभी अखबारों में पढ़ा कि लालू के साले ने पटना रेलवे स्टेशन पर राजधानी एक्सप्रेस का प्लेटफार्म बदलवाने की जिद पकड़ ली, महज इसलिये कि जनाब का माल असबाब दूसरे प्लेटफार्म पर रखा था.
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जंगल गाया-अशोक चक्रधर
जंगल गाया-अशोक चक्रधर
Monday, 26-June-2006 | 05:55 अशोक चक्रधर जी ने अपने कविता संकलन "हंसो और मर जाओ" से "जंगल गाया" कविता अनुनाद में प्रकाशित करने की अनुमति दी है. अनुनाद का सम्पादक मंडल अशोक जी का आभारी है.
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भ्रष्टाचार के पाये चार - श्री
भ्रष्टाचार के पाये चार - श्री
Sunday, 25-June-2006 | 11:10 आज देश में सर्वत्र व्याप्त भ्रष्टाचार पर यह कविता भोजपूरी के प्रसिद्ध कवि पं. राम नवल मिश्र की कविता "खा कौआ मामा, गदाइ गैल जोन्हरी" से प्रेरणा लेकर लिखी गई है. माननीय मिश्र जी ने २५ वर्ष पूर्व पत्रकारों को भ्रष्टाचार की तिकड़ी से दूर रखा था. परन्तु वर्तमान परिपेक्ष्य में पत्रकार भी रोजी-रोटी की खातिर निष्पक्ष नहीं रहा और किसी न किसी रूप में समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है. अभी कल ही छ्पी खबर में उत्तरांचल सेक्स काण्ड के सम्बन्ध में वहां के वरिष्ठ पत्रकार की गिरफ़्तारी और उसके राजनेताओं से सम्बन्धों का पर्दाफ़ाश हुआ है. इस कविता के माध्यम से भ्रष्टाचार के चार पायों की बात रखी गई है. यद्यपि इसका यह तात्पर्य नहीं है कि शत-प्रतिशत नेता-अधिकारी-व्यापारी-पत्रकार भ्रष्ट हैं. आज भी (शायद चिराग लेना पड़े) कुछ ईमान वाले लोग जरूर मिलेंगे.
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डूबता सूरज - सुधान्शु की कविता
डूबता सूरज - सुधान्शु की कविता
Sunday, 25-June-2006 | 10:54 डूबता सूरज - सुधान्शु की कविता -----
डूबते सूरज की लाली भी ऊर्जा का सैलाब है,
बुजुर्गियत का यह आलम भी कमाल है.
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कलम के आदमी:वीरेन्द्र मिश्र "दीपक"
कलम के आदमी:वीरेन्द्र मिश्र "दीपक"
Friday, 23-June-2006 | 07:34 Veerendra Mishra "Deepak" wrote this highly sensitive poem for chaurichaura.com. Click on the picture to read this poem. "Deepak" ji is a sub-editor with Dainik Jagaran news paper published from several places in India including Gorakhpur.
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हरा-भरा सा वृक्ष - नरेन्द्र मिश्र
हरा-भरा सा वृक्ष - नरेन्द्र मिश्र
Thursday, 22-June-2006 | 07:40 नरेन्द्र मिश्र गोरखपुर के युवा कवियों में एक उभरते हुए हस्ताक्षर हैं. चौरीचौरा डॉट कॉम के लिये विशेष रूप से लिखी इस कविता में नरेन्द्र ने पर्यावरण की रक्षा का अत्यन्त ही मार्मिक चित्रण करते हुये कवि की बेबसी दर्शायी है.
मिश्र जी कविता लिखने के साथ-साथ समाज सेवा के कार्यों में भी जोर-शोर से लगे हुये हैं. हमें उम्मीद है कि पाठक-गण इनकी रचना पर विचार प्रकट करेंगे और युवा कवि का उत्साहवर्धन करेंगे.
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साथ हम भी कभी कदम में थे : -सुधान्शु
साथ हम भी कभी कदम में थे : -सुधान्शु
Sunday, 18-June-2006 | 05:08 This poem is by Sudhanshu Tripathi. Kadamba is associated with Lord Krishna, the Hindu god known by various names like Kanha, Kanhaiya, Shyam, Madhav, Muralidhar, Kisana and many more. There is a saying that "हरि के हजार नाम, लाख नाम कृष्ण के"....
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दगाह : A story by Munshi Prem Chand
ईदगाह : A story by Munshi Prem Chand
Friday, 26-May-2006 | 18:24 रमजान के पूरे तीस रोजों के बाद ईद आयी है। कितना मनोहर, कितना सुहावना प्रभाव है। वृक्षों पर अजीब हरियाली है, खेतों में कुछ अजीब रौनक है, आसमान पर कुछ अजीब लालिमा है। आज का सूर्य देखो, कितना प्यारा, कितना शीतल है, यानी संसार को ईद की बधाई दे रहा है। गॉंव में कितनी हलचल है। ईदगाह जाने की तैयारियॉँ हो रही हैं। किसी के कुरते में बटन नहीं है, पड़ोस के घर में सुई-धागा लेने दौड़ा जा रहा है। किसी के जूते कड़े हो गए हैं, उनमें तेल डालने के लिए तेली के घर पर भागा जाता है। जल्दी-जल्दी बैलों को सानी-पानी दे दें। ईदगाह से लौटते-लौटते दोपहर हो जाएगी।
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Hindi Hasya Kavita by Anil Nigam "Bekhabar"
Hindi Hasya Kavita by Anil Nigam "Bekhabar"
Monday, 22-May-2006 | 06:37 घर के हर कोने में ज़ाला पड़ गया,
एक फ़ूहड़ सी बीबी से पाला पड़ गया.
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A poem by Laxmi Narayan Gupta
आधुनिक भक्त की इच्छा (A poem by Laxmi Narayan Gupta)
Thursday, 18-May-2006 | 08:57 (एक मित्र ने कुछ दिन पहले यह इच्छा व्यक्त की थी कि कितना अच्छा होता कि ॠषीकेष में गंगा किनारे उनकी एक कुटिया होती। मैंने उनकी इस इच्छा को यहाँ पर, उनकी अनुमति से, मुखरित करने का प्रयास किया है।)
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होंगे कामयाब : गिरिजा कुमार माथुर
होंगे कामयाब : गिरिजा कुमार माथुर
Wednesday, 17-May-2006 | 09:11 An inspiring poem full with hope by Dr. Girija Kumar Mathur
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मछलियाँ देखती हैं सपनेः डा.रंजना
मछलियाँ देखती हैं सपनेः डा.रंजना
Monday, 15-May-2006 | 03:29 Ranjana Jaiswal has been writing regularly in various magazines of repute. Machhaliyan dekhti hain sapne is her poetry collection published by Lokayat Prakashan, Varanasi.
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Dr. Anil Kumar Srivastava's Book on Chauri Chaura
चौरीचौरा का स्वातंत्र्य समरः डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव
Monday, 15-May-2006 | 02:59 Late Dr. Anil Kumar Srivastava contributed towards clarifying various doubts created by bogus historians about Chauri Chaura "incident" which was indeed a step towards freedom struggle.
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धूप का परचमः डा.हरिओम (Dhoop Ka Parcham by Dr. Hariom)
धूप का परचमः डा.हरिओम (Dhoop Ka Parcham by Dr. Hariom)
Monday, 15-May-2006 | 02:53 Dhoop ka parcham is a collection of gazals by Dr. Hariom. This book was released recently in Gorakhpur.
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नोकियात दूबिः रवीन्द्र श्रीवास्&
नोकियात दूबिः रवीन्द्र श्रीवास्तव
Monday, 15-May-2006 | 01:48 Ravindra Srivastava "Jugani Bhai" is a well known name in Bhojpuri world. He was poineer in taking radio to masses and anchored popular Bhopuri programs from Gorakhpur Station of All India Radio. Nokiyaat Dubi is his latest collection of Bhojpuri poems.
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Neend Tootne Tak : A poetry collection by Anita Tiberewal
नींद टूटने तकः अनिता टिबड़ेवाल (Neend Tootne Tak)
Sunday, 14-May-2006 | 23:45 Anita Tiberewal is a known name in Hindi Literature. She has various publications in Hindi. Here is a sample from her book "Neend Tootne Tak".
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राजेश सिंह
एक ही चेहरा (Ek Hee Chehra)
Sunday, 14-May-2006 | 00:43 राजेश सिंह "बसर" का गज़ल संग्रह
Gazal by Rajesh Singh
जिंदगी तेरे लिये क्या-क्या जतन करना पड़ा,
जिन्दा रहने के लिये विष आचमन करना पड़ा,
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