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विश्व भोजपुरी सम्मेलन का समापन
खाली गीत गवनई से ना बढ़ी भोजपुरी - मैनॅजर पाण्डेय
Sunday, 07-October-2007 | 06:11
विश्व भोजपुरी सम्मेलन के आठवें राष्ट्रीय अधिवेशन के बतकही सत्रों पर जाने-माने साहित्यकार डॉ. मैनेजर पांडेय की खरी-खरी बातें भारी पड़ीं। माइक संभालते ही उन्होंने कहा हमके भोजपुरी के इतिहास नइखे बतियावे के हम खाली भविष्य के बात करब। खाली गीत गवनई से भोजपुरी ना बढ़ी। पहिले दुनिया के लायक भोजपुरी के बनावे के पड़ी, तब एके भाषा बनावे के बात होई।
 
कवि रामजियावन बावला
अलग-थलग रहा बबुआ बोलत ना..का नायक
Friday, 05-October-2007 | 20:05
वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय में गुरुवार को विश्व भोजपुरी सम्मेलन में भोजपुरी संस्कृति का एक अलंबरदार ऐसा भी दिखा जिसने जमीन पर बैठकर भोजन किया। भोजपुरी के प्रख्यात कवि रामजियावन बावला भी इस सम्मेलन में शिरकत करने पहुंचे थे। भोजपुरी को जीने, संजोने और आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाने वाले श्री बावला इस सम्मेलन में लगभग अलग-थलग ही नजर आए। आयोजकों की भी नजर इन पर नहीं पड़ी।
 
भोजपुरी हिन्दी की बड़ी बहन है।
भोजपुरी हवे हिन्दी क बड़की बहिन!
Friday, 05-October-2007 | 20:02
भोजपुरी हिन्दी की बड़ी बहन है। भोजपुरी की पीठ पर ही सवार होकर हिन्दी आगे बढती है। हर उस जगह जहां हिन्दी का प्रभुत्व है भोजपुरी पहले से ही विराजमान रहती है। हिन्दी भोजपुरी का बाहरी रूप है। हिन्दी सबमें बसती है किन्तु हिन्दी बसती है भोजपुरी में। यह निचोड़ है उस विश्व मंच-मेले का जहां दुनिया भर के भोजपुरी अनुरागियों की जमात एकत्र थी।
 
विश्व भोजपुरी सम्मेलन
बड़े जतन से संभाल रखी है थाती
Friday, 05-October-2007 | 19:58
विश्व भोजपुरी सम्मेलन के आठवें अधिवेशन में शिरकत करने काशी हिंदू विश्वविद्यालय पहुंचे मारीशस के लोगों में भोजपुरी के उत्थान का जज्बा दिखा। 40 सदस्यीय दल में सभी भोजपुरी जानते हैं और बोलते भी हैं। पूर्वजों के यहां से गिरमिटिया मजूर के रूप में जाने व यातना सहने का दर्द आज भी उन्हे टीसता है। जागरण प्रतिनिधि से ठेठ भोजपुरी में कहा इहो हमार देश ह आ उहो। हमनी का पुरखा एइजा से भोजपुरी भाषा आ संस्कृति ले के गईल रहलन जा।मारीशस के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री जगदीश गोवर्धन ने कहा भोजपुरी के मरे ना देबे के। भोजपुरी के लिए तो वहां के लोग इतने उतावले हैं कि प्राथमिक शिक्षा में इसे शामिल किया गया है।
 
आव दू गाल बतिया लेई जा
दूसरो दिन गमकल भोजपुरी माटी के सुगंध
Friday, 05-October-2007 | 19:54
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय का स्वतंत्रता भवन शुक्रवार को दूसरे दिन भी भोजपुरी माटी की सुगंध से गमकता रहा। हर तरफ भोजपुरी ही सुनाई दे रही थी। विश्व भोजपुरी सम्मेलन के आठवें राष्ट्रीय अधिवेशन के तहत सबेरे से भोजपुरी बोली के उत्थान पर चर्चा चली। स्वतंत्रता भवन में 'बतकही' का दौर रहा। केंद्रीय कार्यालय में मारीशस व बीएचयू के बीच शैक्षिक आदान-प्रदान की संभावना पर विमर्श हुआ । शैक्षिक आदान-प्रदान की संभावना तलाशने के लिए हुई बैठक में धर्म, दर्शन, सूचना प्रौद्योगिकी, कृषि, चिकित्सा विज्ञान व पैरा मेडिकल आदि विषयों का प्रशिक्षण देने पर गंभीरता से विचार हुआ। बैठक में अध्यक्षता तकनीकी सेल के समन्वयक प्रो. राजकुमार ने की। मारीशस की ओर से एमएसटीडी फेडरेशन के चेयरमैन सोमदत्त दलकमल व दर्पण प्रकाशन के संपादक जयगोविंद हिरा शामिल हुए। बीएचयू की ओर से थे प्रो. डीपी सिंह, प्रो. गजेंद्र सिंह, प्रो. आरपी सिंह, चंद्रमौली उपाध्याय, चंद्रमा पांडेय, प्रो. केके शर्मा, श्रीकिशोर मिश्र, आनंद कुमार श्रीवास्तव, डॉ. एमपी अहिरवार, प्रो. कल्याण सिंह, प्रो. जनार्दन सिंह आदि शामिल थे। दोपहर बाद मारीशस से आया दल काशी के भ्रमण पर निकल पड़ा।
 
बनारस में आयोजित
विश्व भोजपुरी सम्मेलन 2007
Friday, 05-October-2007 | 19:47
वाराणसी। 'भोजपुरी के गंवई आ भोजपुरियन के गंवार कहे वालन के बेंवत नइखे कि भोजपुरी क आगे पसंगा भर खड़ा हो सके। भोजपुरी ऊ भाषा ह जेकरा आखर आखर में विद्रोह भरल बा। इतिहास गवाह बा कि चाहे सत्ता परिवर्तन क लड़ाई होखे चाहे व्यवस्था बदलाव। अगुवाई हमेशा भोजपुरिये कइले बा। दूर गइला के जरूरत नइखे परिचय खातिर खाली मारीशस के नजीर काफी बा। ईहे भोजपुरिया इहां से 'गिरमिटिया' बन के गइलें आ 'गवर्नमेंट' बनके अइलें, सांच कहीं त ई ह भोजपुरी!'
 
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